Seventh Sikh Guru ( 1630 – 1661 )
गुरु हरिराय जी के पवित्र उपदेश
असीम करुणा, पर्यावरण संरक्षण एवं परोपकार के प्रतीक
गुरु हरिराय जी की शिक्षाएं
गुरु हरिराय जी (1630 - 1661) ने परम दयालुता और निष्काम सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने आयुर्वेदिक औषधालय चलाया जहाँ दारा शिकोह का भी इलाज हुआ।
मुख्य योगदान
मुफ्त औषधालय (Herbal Care)
मानवता की सेवा
कीरतपुर साहिब में विशाल जड़ी-बूटी अनुसंधान केंद्र और दवाखाना स्थापित किया।
प्रकृति एवं जीव दया
पर्यावरण संवर्धन
पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के प्रति असीम प्रेम और देखभाल का संदेश दिया।
वाणी की शुद्धता
अतुलनीय सिद्धांत
वाणी की तुकों में फेरबदल करने पर अपने पुत्र रामराय को त्याग दिया।
मुख्य सिद्धांत
शांति एवं शक्ति
2200 घुड़सवारों की सेना रखते हुए भी पूर्ण अहिंसा और शांति बनाई रखी।
निःस्वार्थ सेवा
रोगी और निर्धनों की अनवरत सेवा।
सत्य पर दृढता
किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे सत्य से समझौता न करना।
संगत का मार्गदर्शन
संगत को शुद्ध आचरण और नाम सिमरण से जोड़ा।

