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Sixth Sikh Guru ( 1595 – 1644 )

गुरु हरगोबिंद साहिब जी के उपदेश

मीरी-पीरी के धारक एवं श्री अकाल तख्त साहिब के संस्थापक

गुरु हरगोबिंद साहिब जी की शिक्षाएं

गुरु हरगोबिंद साहिब जी (1595 - 1644) ने सिख पंथ में आत्मरक्षा और धर्म हेतु शस्त्र धारण करने की परंपरा आरंभ की। उन्होंने मीरी और पीरी की दो तलवारें धारण कीं।

मुख्य ऐतिहासिक योगदान

मीरी एवं पीरी सिद्धांत

अध्यात्म एवं शक्ति का संतुलन

आध्यात्मिक मार्ग (पीरी) के साथ अत्याचार के विरोध हेतु सैन्य शक्ति (मीरी) धारण की।

श्री अकाल तख्त साहिब

1609 में स्थापना

सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक एवं न्यायपीठ का निर्माण कराया।

बंदी छोड़ दाता

52 राजाओं की मुक्ति

ग्वालियर किले से 52 राजाओं को अपने चोले की कलियां पकड़ाकर सकुशल मुक्त कराया।

मुख्य सिद्धांत

संत-सिपाही का रूप

सिखों को स्वस्थ, निडर और शस्त्रविद्या में निपुण बनने की प्रेरणा दी।

अत्याचार का प्रतिरोध

अधर्म और अन्याय के विरुद्ध डटकर मुकाबला करना।

ढाडी परंपरा

अकाल तख्त पर वीर रस की ढाडी वारें गाने की परंपरा शुरू की।

कीरतपुर साहिब

कीरतपुर साहिब नगर की स्थापना कर आध्यात्मिक केंद्र बनाया।

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