Eighth Sikh Guru ( 1656 – 1664 )
गुरु हरिकृष्ण जी के पवित्र उपदेश
बाला प्रीतम, परम ज्ञानी एवं दुख भंजन
गुरु हरिकृष्ण जी की शिक्षाएं
गुरु हरिकृष्ण जी (1656 - 1664) ने 5 वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभाली। दिल्ली में चेचक महामारी के समय रोगियों की अनवरत सेवा की।
मुख्य योगदान
महामारी में निष्काम सेवा
बांग्ला साहिब
दिल्ली में चेचक पीड़ितों की सेवा की और पवित्र जल से उनके कष्ट दूर किए।
छज्जू झीवर द्वारा गीता व्याख्या
ज्ञान का प्रकाश
पंडित लालचंद का अहंकार दूर करने हेतु अनपढ़ छज्जू द्वारा भगवद गीता का गूढ़ अर्थ कराया।
बाबा बकाले का संकेत
नवम गुरु की पहचान
जोति जोत समाने से पूर्व 'बाबा बकाले' कहकर गुरु तेग बहादुर जी की ओर संकेत किया।
मुख्य सिद्धांत
दिव्य ज्ञान का स्वरूप
बाल्यावस्था में भी पूर्ण ब्रह्मज्ञान का उदाहरण दिया।
सर्वोच्च आत्मत्याग
दूसरों के कष्टों को अपने ऊपर लेकर 8 वर्ष की आयु में जोति जोत समाए।
अहंकार का विनाश
दिखावे और पाखंड का खंडन।
अरदास की शक्ति
'श्री हरिकृष्ण धियाईऐ जिस डिठै सभि दुखि जाइ॥'

