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Ninth Sikh Guru ( 1621 – 1675 )

गुरु तेग़ बहादुर जी के महान उपदेश

हिंद की चादर, धार्मिक स्वतंत्रता हेतु सर्वोच्च बलिदान

गुरु तेग़ बहादुर जी की शिक्षाएं

गुरु तेग़ बहादुर जी (1621 - 1675) ने कश्मीरी पंडितों और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु 1675 ई. में चांदनी चौक दिल्ली में अपना शीश दिया।

मुख्य ऐतिहासिक योगदान

हिंद की चादर

दिल्ली में सर्वोच्च बलिदान

दूसरों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

श्री आनंदपुर साहिब की स्थापना

चक्क नानकी

1665 में आनंदपुर साहिब की स्थापना की जो खालसा की जन्मभूमि बनी।

सलोक महला 9 (117 श्लोक)

वैराग्य एवं परम शांति

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज 117 श्लोक संसार की नश्वरता और भक्ति का मार्ग बताते हैं।

मुख्य सिद्धांत

भै काहू कउ देत नहि नहि भै मानत आन

न किसी को डराना और न ही किसी से डरना।

धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा

मानव अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता हेतु अभूतपूर्व बलिदान।

वैराग्य और समभाव

'सुखु दुखु दोनौ सम करि जानै ॥' - सुख और दुख में एक समान रहना।

अनन्य प्रभु भक्ति

अंतिम क्षण तक प्रभु नाम में लीन रहना।

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