Fourth Sikh Guru ( 1534 – 1581 )
गुरु रामदास जी के पवित्र उपदेश
श्री अमृतसर साहिब के संस्थापक एवं लावां के रचयिता
गुरु रामदास जी की शिक्षाएं
गुरु रामदास जी (1534 - 1581) ने नम्रता और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने अमृतसर शहर बसाया और आनंद कारज के लिए 4 लावां की रचना की।
मुख्य ऐतिहासिक योगदान
श्री अमृतसर साहिब की स्थापना
रामदासपुर नगर
अमृत सरोवर की खुदाई कराई और रामदासपुर (अमृतसर) शहर की नींव रखी।
लावां की रचना (Anand Karaj)
सिख विवाह मर्यादा
सूही राग में 4 लावां रचीं जो विवाह संस्कार का आध्यात्मिक आधार हैं।
मसंद प्रथा की शुरुआत
संगत संगठन
धार्मिक कार्यों और सरोवर निर्माण हेतु मसंद व्यवस्था आरंभ की।
मुख्य आध्यात्मिक सिद्धांत
परम नम्रता
बाबा श्री चंद जी के साथ भेंट के दौरान सर्वोच्च नम्रता और आदर की मिसाल दी।
अमृत वेला सिमरण
प्रातः काल उठकर नाम जपने और ईश्वर का ध्यान करने की प्रेरणा दी।
679 शब्द (SGGS)
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में 679 मनमोहक शब्द दर्ज हैं।
विश्व बंधुत्व
संसार के सभी जीवों के कल्याण की प्रार्थना और निष्काम सेवा।

